श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 68: लवणासुर का आहार के लिये निकलना, शत्रुघ्न का मधुपुरी के द्वार पर डट जाना और लौटे हुए लवणासुर के साथ उनकी रोषभरी बातचीत  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.68.18 
ईप्सितं यादृशं तुभ्यं सज्जये यावदायुधम्।
तमुवाचाशु शत्रुघ्न: क्व मे जीवन् गमिष्यसि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
मुझे तुम्हें मारने के लिए एक अस्त्र की आवश्यकता है। पहले मैं उसे सुसज्जित कर लूँ, फिर तुम्हें युद्ध करने का अवसर दूँगा।’ यह सुनकर शत्रुघ्न ने तुरन्त कहा, ‘यदि तुम मेरे हाथ से बचकर निकलोगे तो अब कहाँ जाओगे?॥18॥
 
I require a weapon to kill you. Let me first equip it with that weapon and then give you the opportunity to fight.' On hearing this, Shatrughna immediately said, 'Where will you go now if you escape from my hands?॥ 18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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