श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 68: लवणासुर का आहार के लिये निकलना, शत्रुघ्न का मधुपुरी के द्वार पर डट जाना और लौटे हुए लवणासुर के साथ उनकी रोषभरी बातचीत  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.68.17 
तस्य ते युद्धकामस्य युद्धं दास्यामि दुर्मते।
तिष्ठ त्वं च मुहूर्तं तु यावदायुधमानये॥ १७॥
 
 
अनुवाद
'दुरमाते! तुम लड़ना चाहते हो ना? मैं तुम्हें अभी लड़ने का मौका देता हूँ। तुम थोड़ी देर रुको। तब तक मैं भी अपना हथियार लेकर आता हूँ।'
 
‘Durmate! You want to fight, right? I will give you a chance to fight right now. You wait for a while. Till then I will also bring my weapon.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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