श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 68: लवणासुर का आहार के लिये निकलना, शत्रुघ्न का मधुपुरी के द्वार पर डट जाना और लौटे हुए लवणासुर के साथ उनकी रोषभरी बातचीत  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.68.15 
तच्च सर्वं मया क्षान्तं रावणस्य कुलक्षयम्।
अवज्ञां पुरत: कृत्वा मया यूयं विशेषत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
'इतना ही नहीं, उन्होंने रावण के सम्पूर्ण कुल का नाश कर दिया, परन्तु मैंने वह सब सहन किया। तुम सबकी उपेक्षा देखकर भी मैंने तुम सबके प्रति विशेष क्षमाभाव रखा।॥15॥
 
‘Not only this, they destroyed the entire clan of Ravana, but I tolerated all that. Even after seeing the disregard shown by you all, I showed special forgiveness towards all of you.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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