श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 68: लवणासुर का आहार के लिये निकलना, शत्रुघ्न का मधुपुरी के द्वार पर डट जाना और लौटे हुए लवणासुर के साथ उनकी रोषभरी बातचीत  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.68.13 
तस्मिंस्तथा ब्रुवाणे तु राक्षस: प्रहसन्निव।
प्रत्युवाच नरश्रेष्ठं दिष्टॺा प्राप्तोऽसि दुर्मते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उनके ऐसा कहने पर राक्षस ने मुस्कराते हुए पुरुषश्रेष्ठ शत्रुघ्न से कहा - 'धिक्कार है! यह सौभाग्य की बात है कि आज आपने स्वयं मुझे पा लिया है॥ 13॥
 
On his saying this, the demon smilingly said to that best of men Shatrughna - 'Damn! It is fortunate that today you yourself have found me.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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