Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.68.12: मैं युद्ध करना चाहता हूँ। अतः मुझे युद्ध करने का अवसर दो। तुम समस्त प्राणियों के शत्रु हो; अतः मेरे हाथों से जीवित बचकर नहीं निकल सकोगे॥12॥ | ramayan सर्ग 7.68: लवणासुर का आहार के लिये निकलना, शत्रुघ्न का मधुपुरी के द्वार पर डट जाना और लौटे हुए लवणासुर के साथ उनकी रोषभरी बातचीत । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्य मे युद्धकामस्य द्वन्द्वयुद्धं प्रदीयताम्।
शत्रुस्त्वं सर्वभूतानां न मे जीवन् गमिष्यसि॥ १२॥
अनुवाद
मैं युद्ध करना चाहता हूँ। अतः मुझे युद्ध करने का अवसर दो। तुम समस्त प्राणियों के शत्रु हो; अतः मेरे हाथों से जीवित बचकर नहीं निकल सकोगे॥12॥
‘I want to fight. So give me a chance to fight. You are the enemy of all living beings; therefore you will not be able to escape from my hands alive.’॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥