श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 68: लवणासुर का आहार के लिये निकलना, शत्रुघ्न का मधुपुरी के द्वार पर डट जाना और लौटे हुए लवणासुर के साथ उनकी रोषभरी बातचीत  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.68.1 
कथां कथयतां तेषां जयं चाकांक्षतां शुभम्।
व्यतीता रजनी शीघ्रं शत्रुघ्नस्य महात्मन:॥ १॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार शुभ विजय की इच्छा से उन मुनियों की बातें सुनते हुए तथा कथा कहते हुए महात्मा शत्रुघ्न उस रात बातचीत करते हुए ही अन्तिम सांस ले ली ॥1॥
 
In this manner, while narrating the tales and listening to the words of those sages with the desire for auspicious victory, Mahatma Shatrughna passed away that night in conversation. ॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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