श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 67: च्यवन मुनि का शत्रुघ्न को लवणासुर के शूल की शक्ति का परिचय देते हुए राजा मान्धाता के वध का प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.67.26 
त्वं श्व: प्रभाते लवणं महात्मन्
वधिष्यसे नात्र तु संशयो मे।
शूलं विना निर्गतमामिषार्थे
ध्रुवो जयस्ते भविता नरेन्द्र॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘महात्मा! कल प्रातःकाल जब वह बिना भाला लिए मांस लेने निकलेगा, तब आप उसका वध कर देंगे, इसमें संशय नहीं है। हे नरेन्द्र! आपकी अवश्य विजय होगी।’॥26॥
 
‘Mahatma! Tomorrow morning when he will go out to collect meat without taking a spear, then you will kill him, there is no doubt about it. O Narendra! You will surely be victorious.'॥ 26॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे सप्तषष्टितम: सर्ग: ॥ ६ ७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें सरसठवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ६ ७॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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