श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 67: च्यवन मुनि का शत्रुघ्न को लवणासुर के शूल की शक्ति का परिचय देते हुए राजा मान्धाता के वध का प्रसंग सुनाना  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  7.67.24-25 
लोकानां स्वस्ति चैवं स्यात् कृते कर्मणि च त्वया।
एतत् ते सर्वमाख्यातं लवणस्य दुरात्मन:॥ २४॥
शूलस्य च बलं घोरमप्रमेयं नरर्षभ।
विनाशश्चैव मान्धातुर्यत्नेनाभूच्च पार्थिव॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'जब आप इस कार्य को पूर्ण कर लेंगे, तब समस्त लोक धन्य हो जायेंगे। हे पुरुषश्रेष्ठ! इस प्रकार मैंने आपको दुष्टात्मा लवण का सारा बल बताया है और उसके भाले की प्रचण्ड एवं अनन्त शक्ति का भी परिचय कराया है। पृथ्वीनाथ! इन्द्र के प्रयत्न से उसी भाले से राजा मान्धाता का नाश हुआ था।' 24-25
 
‘When you complete this task, all the worlds will be blessed. O best of men! In this way, I have told you all the strength of the evil soul Lavana and also introduced you to the tremendous and infinite power of his spear. Prithvinath! Due to the efforts of Indra, King Mandhaata was destroyed by the same spear. 24-25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)