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ramayan 7.66.3: प्रभु! श्री रामचन्द्रजी की पत्नी ने दो पुत्रों को जन्म दिया है; अतः हे महाप्रतापी महर्षि! आप बाल्यावस्था के कारण उत्पन्न होने वाली बाधाओं को दूर करके उनकी रक्षा करें॥3॥   |   ramayan सर्ग 7.66: सीता के दो पुत्रों का जन्म, वाल्मीकि द्वारा उनकी रक्षा की व्यवस्था और इस समाचार से प्रसन्न हुए शत्रुघ्न का वहाँ से प्रस्थान करके यमुनातट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 66: सीता के दो पुत्रों का जन्म, वाल्मीकि द्वारा उनकी रक्षा की व्यवस्था और इस समाचार से प्रसन्न हुए शत्रुघ्न का वहाँ से प्रस्थान करके यमुनातट पर पहुँचना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.66.3 
भगवन् रामपत्नी सा प्रसूता दारकद्वयम्।
ततो रक्षां महातेज: कुरु भूतविनाशिनीम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! श्री रामचन्द्रजी की पत्नी ने दो पुत्रों को जन्म दिया है; अतः हे महाप्रतापी महर्षि! आप बाल्यावस्था के कारण उत्पन्न होने वाली बाधाओं को दूर करके उनकी रक्षा करें॥3॥
 
Lord! Shri Ramchandraji's wife has given birth to two sons; So, great illustrious Maharishi! May you protect them by removing the obstacles caused by childhood. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)