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ramayan 7.66.17: इस प्रकार रघुकुल के प्रधान वीर महात्मा राजकुमार शत्रुघ्न उन दिनों यमुना के तट पर रात्रि बिताने लगे और वहाँ एकत्रित च्यवन आदि ऋषियों के साथ नाना प्रकार की कथाएँ सुनने लगे॥17॥   |   ramayan सर्ग 7.66: सीता के दो पुत्रों का जन्म, वाल्मीकि द्वारा उनकी रक्षा की व्यवस्था और इस समाचार से प्रसन्न हुए शत्रुघ्न का वहाँ से प्रस्थान करके यमुनातट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 66: सीता के दो पुत्रों का जन्म, वाल्मीकि द्वारा उनकी रक्षा की व्यवस्था और इस समाचार से प्रसन्न हुए शत्रुघ्न का वहाँ से प्रस्थान करके यमुनातट पर पहुँचना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.66.17 
स काञ्चनाद्यैर्मुनिभि: समेतै
रघुप्रवीरो रजनीं तदानीम्।
कथाप्रकारैर्बहुभिर्महात्मा
विरामयामास नरेन्द्रसूनु:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार रघुकुल के प्रधान वीर महात्मा राजकुमार शत्रुघ्न उन दिनों यमुना के तट पर रात्रि बिताने लगे और वहाँ एकत्रित च्यवन आदि ऋषियों के साथ नाना प्रकार की कथाएँ सुनने लगे॥17॥
 
In this way, the brave Mahatma Prince Shatrughan, the chief of Raghu clan, started spending the night on the banks of Yamuna in those days, listening to various stories with the sages like Chyavan and others gathered there. 17॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे षट्षष्टितम: सर्ग: ॥ ६ ६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें छाछठवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ६ ६॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)