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ramayan 7.66.15: मार्ग में सात रातें व्यतीत करके वह यमुना के तट पर पहुँचा और वहाँ पुण्यात्मा महर्षियों के आश्रम में रहने लगा॥15॥   |   ramayan सर्ग 7.66: सीता के दो पुत्रों का जन्म, वाल्मीकि द्वारा उनकी रक्षा की व्यवस्था और इस समाचार से प्रसन्न हुए शत्रुघ्न का वहाँ से प्रस्थान करके यमुनातट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 66: सीता के दो पुत्रों का जन्म, वाल्मीकि द्वारा उनकी रक्षा की व्यवस्था और इस समाचार से प्रसन्न हुए शत्रुघ्न का वहाँ से प्रस्थान करके यमुनातट पर पहुँचना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.66.15 
स गत्वा यमुनातीरं सप्तरात्रोषित: पथि।
ऋषीणां पुण्यकीर्तीनामाश्रमे वासमभ्ययात् ॥ १५॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में सात रातें व्यतीत करके वह यमुना के तट पर पहुँचा और वहाँ पुण्यात्मा महर्षियों के आश्रम में रहने लगा॥15॥
 
After spending seven nights on the way, he reached the banks of Yamuna and started living there in the ashram of virtuous Maharishis. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)