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ramayan 7.66.10: यह सुनकर उन भोली-भाली वृद्धाओं ने एकाग्रचित्त होकर ऋषि के हाथ से प्राप्त कुशा को रक्षा का साधन मानकर उससे उन दोनों बालकों को नहलाया और उनकी रक्षा की॥10॥   |   ramayan सर्ग 7.66: सीता के दो पुत्रों का जन्म, वाल्मीकि द्वारा उनकी रक्षा की व्यवस्था और इस समाचार से प्रसन्न हुए शत्रुघ्न का वहाँ से प्रस्थान करके यमुनातट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 66: सीता के दो पुत्रों का जन्म, वाल्मीकि द्वारा उनकी रक्षा की व्यवस्था और इस समाचार से प्रसन्न हुए शत्रुघ्न का वहाँ से प्रस्थान करके यमुनातट पर पहुँचना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.66.10 
तां रक्षां जगृहुस्तां च मुनिहस्तात् समाहिता:।
अकुर्वंश्च ततो रक्षां तयोर्विगतकल्मषा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर उन भोली-भाली वृद्धाओं ने एकाग्रचित्त होकर ऋषि के हाथ से प्राप्त कुशा को रक्षा का साधन मानकर उससे उन दोनों बालकों को नहलाया और उनकी रक्षा की॥10॥
 
On hearing this the innocent old women with their minds focused took the kusha grass which was from the sage's hand as a means of protection and with it they washed and protected the two boys.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)