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ramayan 7.66.1: उसी रात जब शत्रुघ्न ने पत्तों की कुटिया में प्रवेश किया, उसी समय सीता ने दो पुत्रों को जन्म दिया॥1॥   |   ramayan सर्ग 7.66: सीता के दो पुत्रों का जन्म, वाल्मीकि द्वारा उनकी रक्षा की व्यवस्था और इस समाचार से प्रसन्न हुए शत्रुघ्न का वहाँ से प्रस्थान करके यमुनातट पर पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 66: सीता के दो पुत्रों का जन्म, वाल्मीकि द्वारा उनकी रक्षा की व्यवस्था और इस समाचार से प्रसन्न हुए शत्रुघ्न का वहाँ से प्रस्थान करके यमुनातट पर पहुँचना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  7.66.1 
यामेव रात्रिं शत्रुघ्न: पर्णशालां समाविशत्।
तामेव रात्रिं सीतापि प्रसूता दारकद्वयम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
उसी रात जब शत्रुघ्न ने पत्तों की कुटिया में प्रवेश किया, उसी समय सीता ने दो पुत्रों को जन्म दिया॥1॥
 
On the same night when Shatrughna entered the hut of leaves, Sita gave birth to two sons.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)