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ramayan 7.65.5: शत्रुघ्न के ये वचन सुनकर महर्षि वाल्मीकि ने मुस्कुराते हुए महात्मा से कहा - 'हे वीर! आपका स्वागत है।   |   ramayan सर्ग 7.65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.65.5 
शत्रुघ्नस्य वच: श्रुत्वा प्रहस्य मुनिपुङ्गव:।
प्रत्युवाच महात्मानं स्वागतं ते महायश:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
शत्रुघ्न के ये वचन सुनकर महर्षि वाल्मीकि ने मुस्कुराते हुए महात्मा से कहा - 'हे वीर! आपका स्वागत है।
 
On hearing these words of Shatrughna, sage Valmiki smilingly replied to the great soul - 'O great hero! You are most welcome.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)