Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 7.65.4: प्रभु! मैं अपने बड़े भाई श्री रघुनाथजी के कार्य से यहाँ आया हूँ। मैं आज रात यहीं रुकना चाहता हूँ और कल प्रातःकाल वरुणदेव द्वारा पोषित पश्चिम दिशा में जाऊँगा।॥4॥   |   ramayan सर्ग 7.65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  7.65.4 
भगवन् वस्तुमिच्छामि गुरो: कृत्यादिहागत:।
श्व: प्रभाते गमिष्यामि प्रतीचीं वारुणीं दिशम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! मैं अपने बड़े भाई श्री रघुनाथजी के कार्य से यहाँ आया हूँ। मैं आज रात यहीं रुकना चाहता हूँ और कल प्रातःकाल वरुणदेव द्वारा पोषित पश्चिम दिशा में जाऊँगा।॥4॥
 
Lord! I have come here for the work of my elder brother Shri Raghunathji. I want to stay here tonight and tomorrow morning I will go to the west direction nurtured by Varundev.'॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)