श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  7.65.39 
तस्य तां पार्थिवेन्द्रस्य कथां श्रुत्वा सुदारुणाम्।
विवेश पर्णशालायां महर्षिमभिवाद्य च॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
महाराज मित्रासह की वह अत्यन्त दुःखद कथा सुनकर शत्रुघ्न ने महर्षि को प्रणाम किया और महल में प्रवेश किया ॥39॥
 
After listening to that very painful story of Maharaj Mitrasah, Shatrughan bowed to Maharishi and entered the palace. 39॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये उत्तरकाण्डे पञ्चषष्टितम: सर्ग: ॥ ६ ५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके उत्तरकाण्डमें पैंसठवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ ६ ५॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)