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ramayan 7.65.35: हे राजन! मैंने क्रोध में जो कुछ कहा है, उसे तो बदला नहीं जा सकता; परन्तु तुम्हें इससे मुक्त करने के लिए मैं तुम्हें वरदान देता हूँ ॥35॥   |   ramayan सर्ग 7.65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.65.35 
मया रोषपरीतेन यदिदं व्याहृतं वच:।
नैतच्छक्यं वृथा कर्तुं प्रदास्यामि च ते वरम्॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मैंने क्रोध में जो कुछ कहा है, उसे तो बदला नहीं जा सकता; परन्तु तुम्हें इससे मुक्त करने के लिए मैं तुम्हें वरदान देता हूँ ॥35॥
 
"O King! What I have said in anger cannot be undone; but to free you from this, I will grant you a boon. ॥35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)