Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.65.33: तत्पश्चात् राजा ने अपनी पत्नी सहित बारम्बार प्रणाम करके वसिष्ठजी से कहा - 'ब्रह्मर्षि! किसी ने आपका ही रूप धारण करके मुझे आपको ऐसा भोजन देने की प्रेरणा दी थी।' | ramayan सर्ग 7.65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स राजा सह पत्न्या वै प्रणिपत्य मुहुर्मुहु:।
पुनर्वसिष्ठं प्रोवाच यदुक्तं ब्रह्मरूपिणा॥ ३३॥
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा ने अपनी पत्नी सहित बारम्बार प्रणाम करके वसिष्ठजी से कहा - 'ब्रह्मर्षि! किसी ने आपका ही रूप धारण करके मुझे आपको ऐसा भोजन देने की प्रेरणा दी थी।'
‘Thereafter the king along with his wife bowed down repeatedly and said to Vasishtha - 'Brahmarishha! Someone had assumed your form and inspired me to give you such food.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥