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ramayan 7.65.27: यह जानकर कि थाली में मनुष्य का मांस परोसा गया है, वसिष्ठ ऋषि बड़े क्रोध से भर गए और इस प्रकार बोले-॥27॥   |   ramayan सर्ग 7.65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.65.27 
ज्ञात्वा तदामिषं विप्रो मानुषं भाजनं गतम्।
क्रोधेन महताविष्टो व्याहर्तुमुपचक्रमे॥ २७॥
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि थाली में मनुष्य का मांस परोसा गया है, वसिष्ठ ऋषि बड़े क्रोध से भर गए और इस प्रकार बोले-॥27॥
 
Knowing that human flesh had been served on the plate, the sage Vasishtha was filled with great anger and spoke as follows:॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)