श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.65.22 
तच्छ्रुत्वा व्याहृतं वाक्यं रक्षसा ब्रह्मरूपिणा।
सूदान् संस्कारकुशलानुवाच पृथिवीपति:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘ब्राह्मणवेशधारी राक्षस के वचन सुनकर राजा ने कुशल रसोइयों से कहा-॥22॥
 
‘After listening to the words of the demon disguised as a Brahmin, the king said to the skilled cooks -॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)