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श्लोक  7.65.20 
अथावसाने यज्ञस्य पूर्ववैरमनुस्मरन्।
वसिष्ठरूपी राजानमिति होवाच राक्षस:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
यज्ञ समाप्त होने पर राक्षस को अपनी पुरानी शत्रुता का स्मरण हो आया और उसने वसिष्ठ का रूप धारण कर लिया और राजा के पास आकर इस प्रकार बोला:
 
‘After the sacrifice was over, the demon, remembering his past enmity, took the form of Vasishtha and came to the king and spoke thus:
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)