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ramayan 7.65.19: ‘यहाँ उनका महान यज्ञ अनेक वर्षों तक चलता रहा। वह यज्ञ, जो धन-धान्य से परिपूर्ण था, देवताओं के यज्ञ के समान था।॥19॥   |   ramayan सर्ग 7.65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  7.65.19 
तत्र यज्ञो महानासीद् बहुवर्षगणायुत:।
समृद्ध: परया लक्ष्म्या देवयज्ञसमोऽभवत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘यहाँ उनका महान यज्ञ अनेक वर्षों तक चलता रहा। वह यज्ञ, जो धन-धान्य से परिपूर्ण था, देवताओं के यज्ञ के समान था।॥19॥
 
‘His great sacrifice continued here for many years. That sacrifice, which was full of wealth and riches, was equal to the sacrifice of the gods.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)