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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 7: उत्तर काण्ड
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सर्ग 65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना
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श्लोक 17
श्लोक
7.65.17
एवमुक्त्वा तु तद् रक्षस्तत्रैवान्तरधीयत।
कालपर्याययोगेन राजा मित्रसहोऽभवत्॥ १७॥
अनुवाद
ऐसा कहकर वह राक्षस वहाँ से अन्तर्धान हो गया और बहुत काल के पश्चात् सुदासकुमार मित्र अयोध्या का राजा हुआ ॥17॥
Having said this, the demon vanished there and after a long time, Sudaskumar Mitras became the king of Ayodhya. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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