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ramayan 7.65.15: जब सौदास उस राक्षस के मरे हुए साथी को देख रहा था, तब दूसरा राक्षस उसे देखकर हृदय में बहुत दुःखी हुआ और सौदास से इस प्रकार बोला -॥15॥   |   ramayan सर्ग 7.65: महर्षि वाल्मीकि का शत्रुघ्न को सुदासपुत्र कल्माषपाद की कथा सुनाना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.65.15 
निरीक्षमाणं तं दृष्ट्वा सहायं तस्य रक्षस:।
संतापमकरोद् घोरं सौदासं चेदमब्रवीत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जब सौदास उस राक्षस के मरे हुए साथी को देख रहा था, तब दूसरा राक्षस उसे देखकर हृदय में बहुत दुःखी हुआ और सौदास से इस प्रकार बोला -॥15॥
 
When Saudasa was looking at the dead companion of that demon, the other demon looked at him and felt very sad in his heart and said to Saudasa thus -॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)