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श्लोक  7.65.1 
प्रस्थाप्य च बलं सर्वं मासमात्रोषित: पथि।
एक एवाशु शत्रुघ्नो जगाम त्वरितं तदा॥ १॥
 
 
अनुवाद
अपनी सेना को आगे भेजकर और एक मास तक अयोध्या में रहकर शत्रुघ्न वहाँ से अकेले ही मधुवन के मार्ग से चल पड़े। वे बड़े वेग से आगे बढ़ने लगे॥1॥
 
After sending his army ahead and staying in Ayodhya for a month, Shatrughna left alone from there on the way to Madhuvan. He started moving forward with great speed.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)