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ramayan 7.64.5: यह सेना अच्छी तरह से तृप्त हो चुकी है। यह हर्ष और उत्साह से युक्त, संतुष्ट, अहंकार से रहित और सदैव आपके अधीन है। हे पुरुषश्रेष्ठ! मधुर वाणी बोलकर और धन देकर इसे प्रसन्न रखें॥5॥   |   ramayan सर्ग 7.64: श्रीराम की आज्ञा के अनुसार शत्रुघ्न का सेना को आगे भेजकर एक मास के पश्चात् स्वयं भी प्रस्थान करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 64: श्रीराम की आज्ञा के अनुसार शत्रुघ्न का सेना को आगे भेजकर एक मास के पश्चात् स्वयं भी प्रस्थान करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.64.5 
बलं च सुभृतं वीर हृष्टतुष्टमनुद्धतम्।
सम्भाषासम्प्रदानेन रञ्जयस्व नरोत्तम॥ ५॥
 
 
अनुवाद
यह सेना अच्छी तरह से तृप्त हो चुकी है। यह हर्ष और उत्साह से युक्त, संतुष्ट, अहंकार से रहित और सदैव आपके अधीन है। हे पुरुषश्रेष्ठ! मधुर वाणी बोलकर और धन देकर इसे प्रसन्न रखें॥5॥
 
‘This army has been well-fed. It is full of joy and enthusiasm, satisfied, devoid of arrogance and is always under your command. O best of men! Keep it happy by speaking sweetly and by giving it money.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)