श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 64: श्रीराम की आज्ञा के अनुसार शत्रुघ्न का सेना को आगे भेजकर एक मास के पश्चात् स्वयं भी प्रस्थान करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.64.15 
तथा तांस्तु समाज्ञाप्य प्रस्थाप्य च महद‍्बलम्।
कौसल्यां च सुमित्रां च कैकेयीं चाभ्यवादयत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपने सेनापतियों को आदेश देकर तथा अपनी विशाल सेना को आगे भेजकर शत्रुघ्न ने कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी को प्रणाम किया।
 
Having thus ordered his commanders and sent his large army ahead, Shatrughna bowed to Kausalya, Sumitra and Kaikeyi.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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