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श्लोक 7.64.12  |
तत्र स्थाप्य बलं सर्वं नदीतीरे समाहित:।
अग्रतो धनुषा सार्धं गच्छ त्वं लघुविक्रम॥ १२॥ |
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| अनुवाद |
| "हे वीर योद्धा! तब तुम वहाँ गंगा नदी के तट पर सारी सेना को रोक दो और केवल अपना धनुष धारण करके अकेले ही अत्यंत सावधानी से आगे बढ़ो।"॥12॥ |
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| "O valiant warrior! Then stop the whole army there on the bank of river Ganga and go ahead alone with utmost caution, holding only your bow."॥ 12॥ |
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