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ramayan 7.62.5: जैसे प्रलय के समय यमराज मुँह खोले खड़े रहते हैं, वैसे ही वह महाबली राक्षस अन्य प्राणियों को भी खाता रहता है।॥5॥   |   ramayan सर्ग 7.62: श्रीराम का ऋषियों से लवणासुर के आहार-विहार के विषयमें पूछना और शत्रुघ्न की रुचि जानकर उन्हें लवण वध के कार्य में नियुक्त करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 62: श्रीराम का ऋषियों से लवणासुर के आहार-विहार के विषयमें पूछना और शत्रुघ्न की रुचि जानकर उन्हें लवण वध के कार्य में नियुक्त करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.62.5 
ततोऽन्तराणि सत्त्वानि खादते स महाबल:।
संहारे समनुप्राप्ते व्यादितास्य इवान्तक:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जैसे प्रलय के समय यमराज मुँह खोले खड़े रहते हैं, वैसे ही वह महाबली राक्षस अन्य प्राणियों को भी खाता रहता है।॥5॥
 
Like Yamaraja standing with open mouth at the time of destruction, that mighty demon keeps on devouring other living beings as well.'॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)