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ramayan 7.62.2: श्री रघुनाथजी के ये वचन सुनकर सब ऋषियों ने लवणासुर के पालन-पोषण का जो आहार और व्यवहार हुआ था, वह सब कह सुनाया॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 7.62: श्रीराम का ऋषियों से लवणासुर के आहार-विहार के विषयमें पूछना और शत्रुघ्न की रुचि जानकर उन्हें लवण वध के कार्य में नियुक्त करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 62: श्रीराम का ऋषियों से लवणासुर के आहार-विहार के विषयमें पूछना और शत्रुघ्न की रुचि जानकर उन्हें लवण वध के कार्य में नियुक्त करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.62.2 
राघवस्य वच: श्रुत्वा ऋषय: सर्व एव ते।
ततो निवेदयामासुर्लवणो ववृधे यथा॥ २॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी के ये वचन सुनकर सब ऋषियों ने लवणासुर के पालन-पोषण का जो आहार और व्यवहार हुआ था, वह सब कह सुनाया॥ 2॥
 
On hearing these words of Sri Raghunath, all the sages narrated the kind of food and behaviour with which Lavanasur was brought up.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)