Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.62.13-14h: पृथ्वीनाथ! महाप्रतापी भरत ने पहले नन्दिग्राम में कष्टमय शय्या पर सोते हुए अनेक कष्ट सहे थे। वे फल-मूल खाकर रहते थे और सिर पर जटाओं वाले चिथड़े पहनते थे।॥13 1/2॥ | ramayan सर्ग 7.62: श्रीराम का ऋषियों से लवणासुर के आहार-विहार के विषयमें पूछना और शत्रुघ्न की रुचि जानकर उन्हें लवण वध के कार्य में नियुक्त करना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथ्वीनाथ! महाप्रतापी भरत ने पहले नन्दिग्राम में कष्टमय शय्या पर सोते हुए अनेक कष्ट सहे थे। वे फल-मूल खाकर रहते थे और सिर पर जटाओं वाले चिथड़े पहनते थे।॥13 1/2॥
‘Prithvi Nath! The illustrious Bharata had earlier suffered many hardships while sleeping on a painful bed in Nandigram. He lived on fruits and roots and wore rags with matted hair on his head.॥ 13 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥