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ramayan 7.62.12: पहले जब अयोध्यापुरी आपके बिना सूनी हो गई थी, तब भी उन्होंने आपके आगमन के समय तक हृदय में बड़ी वेदना के साथ उसकी देखभाल की थी॥ 12॥   |   ramayan सर्ग 7.62: श्रीराम का ऋषियों से लवणासुर के आहार-विहार के विषयमें पूछना और शत्रुघ्न की रुचि जानकर उन्हें लवण वध के कार्य में नियुक्त करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 62: श्रीराम का ऋषियों से लवणासुर के आहार-विहार के विषयमें पूछना और शत्रुघ्न की रुचि जानकर उन्हें लवण वध के कार्य में नियुक्त करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  7.62.12 
आर्येण हि पुरा शून्या त्वयोध्या परिपालिता।
संतापं हृदये कृत्वा आर्यस्यागमनं प्रति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
पहले जब अयोध्यापुरी आपके बिना सूनी हो गई थी, तब भी उन्होंने आपके आगमन के समय तक हृदय में बड़ी वेदना के साथ उसकी देखभाल की थी॥ 12॥
 
Earlier, when Ayodhyapuri had become desolate without you, he had looked after it with great anguish in his heart until the time of your arrival.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)