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ramayan 7.61.5: मधु बल और पराक्रम से संपन्न था और सदैव धर्म-कर्म में तत्पर रहता था। वह भगवान शिव की बहुत आराधना करता था, जिसके फलस्वरूप भगवान शिव ने उसे अद्भुत वरदान दिया था॥5॥   |   ramayan सर्ग 7.61: ऋषियों का मधु को प्राप्त हुए वर तथा लवणासुर के बल और अत्याचार का वर्णन करके उससे प्राप्त होनेवाले भय को दूर करने के लिये श्रीरघुनाथजी से प्रार्थना करना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 61: ऋषियों का मधु को प्राप्त हुए वर तथा लवणासुर के बल और अत्याचार का वर्णन करके उससे प्राप्त होनेवाले भय को दूर करने के लिये श्रीरघुनाथजी से प्रार्थना करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.61.5 
स मधुर्वीर्यसम्पन्नो धर्मं च सुसमाहित:।
बहुमानाच्च रुद्रेण दत्तस्तस्याद्भुतो वर:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
मधु बल और पराक्रम से संपन्न था और सदैव धर्म-कर्म में तत्पर रहता था। वह भगवान शिव की बहुत आराधना करता था, जिसके फलस्वरूप भगवान शिव ने उसे अद्भुत वरदान दिया था॥5॥
 
Madhu was blessed with strength and valour and was always devoted to religious rituals with full concentration. He worshipped Lord Shiva a lot, due to which he granted him a wonderful boon.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)