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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 64-65h
 
 
श्लोक  7.6.64-65h 
आबद‍्ध्य शरसम्पूर्णे इषुधी विमले तदा॥ ६४॥
श्रोणिसूत्रं च खड्गं च विमलं कमलेक्षण:।
 
 
अनुवाद
इसके अतिरिक्त उन्होंने बाणों से भरे हुए दो चमकते हुए तरकश भी बाँध रखे थे। कमल-नेत्र श्रीहरि ने अपनी कमर में एक मेखला बाँध रखी थी और उसमें एक चमकती हुई तलवार लटका रखी थी।
 
Besides this, he also had tied two glittering quivers full of arrows. The lotus-eyed Shri Hari had tied a belt around his waist and hung a glittering sword from it. 64 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)