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ramayan 7.6.62-63h: देवताओं के दूत से दैत्यों की युद्ध-संबंधी गतिविधियों के विषय में सुनकर भगवान नारायण ने भी युद्ध करने का विचार किया ॥62 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 62-63h
 
 
श्लोक  7.6.62-63h 
राक्षसानां समुद्योगं तं तु नारायण: प्रभु:॥ ६२॥
देवदूतादुपश्रुत्य चक्रे युद्धे तदा मन:।
 
 
अनुवाद
देवताओं के दूत से दैत्यों की युद्ध-संबंधी गतिविधियों के विषय में सुनकर भगवान नारायण ने भी युद्ध करने का विचार किया ॥62 1/2॥
 
Hearing from the messenger of the gods about the war-related activities of the demons, Lord Narayana also thought of fighting. 62 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)