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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 60-61h
 
 
श्लोक  7.6.60-61h 
माल्यवन्तं तु ते सर्वे माल्यवन्तमिवाचलम्॥ ६०॥
निशाचरा आश्रयन्ति धातारमिव देवता:।
 
 
अनुवाद
जैसे देवता ब्रह्माजी की शरण लेते हैं, उसी प्रकार समस्त रात्रिचर जीव माल्यवान की शरण में गए थे, जो माल्यवान पर्वत के समान अचल थे।
 
Just as the gods take shelter of Lord Brahma, similarly all the night creatures had taken shelter of Malyavan who was as immovable as the Malyavan mountain. 60 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)