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ramayan 7.6.59-60h: माल्यवान, सुमाली और महाबली माली - ये तीनों ही प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी शरीर वाले समस्त राक्षसों के आगे-आगे चल रहे थे ॥59 1/2॥   |   ramayan सर्ग 7.6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 59-60h
 
 
श्लोक  7.6.59-60h 
माल्यवांश्च सुमाली च माली च सुमहाबल:॥ ५९॥
पुरस्सरा राक्षसानां ज्वलिता इव पावका:।
 
 
अनुवाद
माल्यवान, सुमाली और महाबली माली - ये तीनों ही प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी शरीर वाले समस्त राक्षसों के आगे-आगे चल रहे थे ॥59 1/2॥
 
Malyavan, Sumali and Mahabali Mali – all three of them were walking ahead of all the demons with bodies as bright as blazing fire. 59 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)