Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.6.58-59h: राक्षस अपनी शक्ति के अभिमान में मदमस्त हो रहे थे। वे मृत्यु के पाश में बंध चुके थे। अतः उन कष्टों की उपेक्षा करके वे युद्ध के लिए आगे बढ़ गए और फिर वापस नहीं लौटे। | ramayan सर्ग 7.6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उत्पातांस्ताननादृत्य राक्षसा बलदर्पिता:॥ ५८॥
यान्त्येव न निवर्तन्ते मृत्युपाशावपाशिता:।
अनुवाद
राक्षस अपनी शक्ति के अभिमान में मदमस्त हो रहे थे। वे मृत्यु के पाश में बंध चुके थे। अतः उन कष्टों की उपेक्षा करके वे युद्ध के लिए आगे बढ़ गए और फिर वापस नहीं लौटे।
The demons were getting intoxicated with the pride of their power. They were bound in the noose of death. Therefore, ignoring those troubles, they went ahead for the war and did not return. 58 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥