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ramayan 7.6.54: बादलों से गर्म रक्त और हड्डियाँ बरसने लगीं, समुद्र अपनी सीमा से आगे बढ़ गए और पहाड़ हिलने लगे। 54.   |   ramayan सर्ग 7.6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  7.6.54 
अस्थीनि मेघा ववृषुरुष्णं शोणितमेव च।
वेलां समुद्राश्चोत्क्रान्ताश्चेलुश्चाप्यथ भूधरा:॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
बादलों से गर्म रक्त और हड्डियाँ बरसने लगीं, समुद्र अपनी सीमा से आगे बढ़ गए और पहाड़ हिलने लगे। 54.
 
The clouds began to rain hot blood and bones, the oceans exceeded their limits and the mountains began to shake. 54.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)