श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  7.6.53 
भौमाश्चैवान्तरिक्षाश्च कालाज्ञप्ता भयावहा:।
उत्पाता राक्षसेन्द्राणामभावाय समुत्थिता:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
उस समय काल के प्रभाव से पृथ्वी और आकाश में अनेक भयंकर विपत्तियाँ प्रकट होने लगीं, जो दैत्यों के विनाश का संकेत दे रही थीं ॥ 53॥
 
At that time, due to the influence of Time, many dreadful calamities began to appear on earth and in the sky, which were signalling the destruction of the demons. ॥ 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)