श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 50-51h
 
 
श्लोक  7.6.50-51h 
लङ्काविपर्ययं दृष्ट्वा यानि लङ्कालयान्यथ॥ ५०॥
भूतानि भयदर्शीनि विमनस्कानि सर्वश:।
 
 
अनुवाद
लंका में रहने वाले सभी प्राणी और ग्राम देवता अपशकुन आदि से लंका का भावी विनाश देखकर भयग्रस्त हो गए और हृदय में दुःखी हो गए।
 
All the creatures and village deities residing in Lanka, seeing the future destruction of Lanka through bad omens etc., felt fear and became sad in their hearts.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)