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ramayan 7.6.47-50h: वे सभी शत्रु राक्षस अपने बल पर गर्व करते हुए रथ, हाथी, हाथी जैसे घोड़े, गधे, बैल, ऊँट, साँप, मगरमच्छ, कछुए, मछली, चील, सिंह, बाघ, सूअर, हिरण और नीलगाय आदि पक्षियों पर सवार होकर लंका से निकलकर युद्ध के लिए देवलोक की ओर चल पड़े।   |   ramayan सर्ग 7.6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 47-50h
 
 
श्लोक  7.6.47-50h 
स्यन्दनैर्वारणैश्चैव हयैश्च करिसंनिभै:॥ ४७॥
खरैर्गोभिरथोष्ट्रैश्च शिशुमारैर्भुजंगमै:।
मकरै: कच्छपैर्मीनैर्विहंगैर्गरुडोपमै:॥ ४८॥
सिंहैर्व्याघ्रैर्वराहैश्च सृमरैश्चमरैरपि।
त्यक्त्वा लङ्कां गता: सर्वे राक्षसा बलगर्विता:॥ ४९॥
प्रयाता देवलोकाय योद्धुं दैवतशत्रव:।
 
 
अनुवाद
वे सभी शत्रु राक्षस अपने बल पर गर्व करते हुए रथ, हाथी, हाथी जैसे घोड़े, गधे, बैल, ऊँट, साँप, मगरमच्छ, कछुए, मछली, चील, सिंह, बाघ, सूअर, हिरण और नीलगाय आदि पक्षियों पर सवार होकर लंका से निकलकर युद्ध के लिए देवलोक की ओर चल पड़े।
 
All those enemy demons, proud of their strength, riding on chariots, elephants, elephant-like horses, donkeys, bulls, camels, ibex, snakes, crocodiles, tortoises, fishes, birds like eagles, lions, tigers, boars, deers and Nilgais etc., left Lanka and proceeded towards Devaloka for war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)