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ramayan 7.6.42: नारायण, रुद्र, इन्द्र और यमराज, ये सभी हमारे सामने खड़े होने से सदैव डरते हैं॥ 42॥   |   ramayan सर्ग 7.6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  7.6.42 
नारायणश्च रुद्रश्च शक्रश्चापि यमस्तथा।
अस्माकं प्रमुखे स्थातुं सर्वे बिभ्यति सर्वदा॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
नारायण, रुद्र, इन्द्र और यमराज, ये सभी हमारे सामने खड़े होने से सदैव डरते हैं॥ 42॥
 
‘Narayana, Rudra, Indra and Yamaraja, all are always afraid of standing before us.॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)