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ramayan 7.6.41: ‘इतना ही नहीं, हमने अपने शस्त्रों के बल से देवताओं की सेना के गहरे समुद्र में प्रवेश करके ऐसे शत्रुओं को जीत लिया है जो वीरता में अद्वितीय थे; अतः हमें मृत्यु का कोई भय नहीं है॥41॥   |   ramayan सर्ग 7.6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.6.41 
देवसागरमक्षोभ्यं शस्त्रै: समवगाह्य च।
जिता द्विषो ह्यप्रतिमास्तन्नो मृत्युकृतं भयम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
‘इतना ही नहीं, हमने अपने शस्त्रों के बल से देवताओं की सेना के गहरे समुद्र में प्रवेश करके ऐसे शत्रुओं को जीत लिया है जो वीरता में अद्वितीय थे; अतः हमें मृत्यु का कोई भय नहीं है॥41॥
 
‘Not only this, by the power of our weapons we have entered the deep sea of ​​the army of the gods and have conquered such enemies who were unmatched in bravery; hence we have no fear of death.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)