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ramayan 7.6.40: उन्होंने कहा, "दैत्यराज! हमने वेदों का अध्ययन किया है, दान दिया है और यज्ञ किए हैं। हमने अपने धन की रक्षा की है और उसका उपभोग किया है। हमने रोगमुक्त जीवन प्राप्त किया है और कर्तव्य मार्ग में उत्तम धर्म की स्थापना की है ॥ 40॥   |   ramayan सर्ग 7.6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  7.6.40 
स्वधीतं दत्तमिष्टं च ऐश्वर्यं परिपालितम्।
आयुर्निरामयं प्राप्तं सुधर्म: स्थापित: पथि॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने कहा, "दैत्यराज! हमने वेदों का अध्ययन किया है, दान दिया है और यज्ञ किए हैं। हमने अपने धन की रक्षा की है और उसका उपभोग किया है। हमने रोगमुक्त जीवन प्राप्त किया है और कर्तव्य मार्ग में उत्तम धर्म की स्थापना की है ॥ 40॥
 
They said, "King of demons! We have studied the Vedas, given alms and performed sacrifices. We have protected our wealth and enjoyed it. We have attained a life free from diseases and have established the best Dharma in the path of duty. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)