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ramayan 7.6.38: नारायणदेव ने ऐसे सैकड़ों-हजारों राक्षसों का वध किया है। यह जानकर हम सबका कर्तव्य पालन करना चाहिए। जो नारायणदेव हमारा वध करना चाहते हैं, उन्हें परास्त करना अत्यन्त कठिन है।॥38॥   |   ramayan सर्ग 7.6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  7.6.38 
नारायणेन निहता: शतशोऽथ सहस्रश:।
एतज्ज्ञात्वा तु सर्वेषां क्षमं कर्तुमिहार्हथ।
दु:खं नारायणं जेतुं यो नो हन्तुमिहेच्छति॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
नारायणदेव ने ऐसे सैकड़ों-हजारों राक्षसों का वध किया है। यह जानकर हम सबका कर्तव्य पालन करना चाहिए। जो नारायणदेव हमारा वध करना चाहते हैं, उन्हें परास्त करना अत्यन्त कठिन है।॥38॥
 
‘Narayandev has killed hundreds and thousands of such demons. Knowing this, we should do the right duty for all of us. It is very difficult to defeat Narayandev who wants to kill us.'॥ 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)