vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 7: उत्तर काण्ड
»
सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना
»
श्लोक 28
श्लोक
7.6.28
इत्येवं त्रिदशैरुक्तो निशम्यान्धकसूदन:।
शिर: करं च धुन्वान इदं वचनमब्रवीत्॥ २८॥
अनुवाद
देवताओं के ऐसा कहने पर अंधकार के शत्रु भगवान शिव ने सिर और हाथ हिलाकर अपनी असहमति प्रकट की और इस प्रकार कहा-॥28॥
When the gods said this, Lord Shiva, the enemy of darkness, shook his head and hands to indicate disapproval and said this -॥ 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×