Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 7.6.18: हे प्रभु! वे दैत्य अहंकार से मदमस्त हो रहे हैं। हमें कष्ट देकर वे अत्यन्त प्रसन्न हो रहे हैं। अतः आप युद्धस्थल में उनके बन्धु-बान्धवों सहित उनका वध करके हमारा भय उसी प्रकार दूर कीजिए, जैसे सूर्यदेव कोहरे का नाश कर देते हैं।॥18॥ | ramayan सर्ग 7.6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना । ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रभु! वे दैत्य अहंकार से मदमस्त हो रहे हैं। हमें कष्ट देकर वे अत्यन्त प्रसन्न हो रहे हैं। अतः आप युद्धस्थल में उनके बन्धु-बान्धवों सहित उनका वध करके हमारा भय उसी प्रकार दूर कीजिए, जैसे सूर्यदेव कोहरे का नाश कर देते हैं।॥18॥
O Lord! Those demons are getting intoxicated with arrogance. They are very happy after tormenting us. Therefore, please kill them along with their relatives in the battlefield and remove our fear in the same way as the Sun God destroys the fog.'॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥