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ramayan 7.6.15: वे त्रिकूट पर्वत के शिखर पर लंका नामक दुर्गम नगरी में रहकर रात्रि में हम सब देवताओं को कष्ट पहुँचाते रहते हैं॥15॥   |   ramayan सर्ग 7.6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.6.15 
लङ्का नाम पुरी दुर्गा त्रिकूटशिखरे स्थिता।
तत्र स्थिता: प्रबाधन्ते सर्वान् न: क्षणदाचरा:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
वे त्रिकूट पर्वत के शिखर पर लंका नामक दुर्गम नगरी में रहकर रात्रि में हम सब देवताओं को कष्ट पहुँचाते रहते हैं॥15॥
 
By staying in the inaccessible city named Lanka on the peak of Trikuta mountain, they continue to cause trouble to all of us gods at night. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)