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ramayan 7.6.14: हे देव! सुकेश के तीनों पुत्र तीन प्रकार की अग्नियों के समान तेजस्वी हैं। उन्होंने वरदान की शक्ति से हम पर आक्रमण करके हमारा स्थान छीन लिया है।   |   ramayan सर्ग 7.6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना   ।   ramayan काण्ड 7: उत्तर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  सर्ग 6: देवताओं का भगवान् शङ्कर की सलाह से राक्षसों के वध के लिये भगवान् विष्णुकी शरण में जाना और उनसे आश्वासन पाकर लौटना, राक्षसों का देवताओं पर आक्रमण और भगवान् विष्णु का उनकी सहायता के लिये आना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  7.6.14 
सुकेशतनयैर्देव त्रिभिस्त्रेताग्निसंनिभै:।
आक्रम्य वरदानेन स्थानान्यपहृतानि न:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे देव! सुकेश के तीनों पुत्र तीन प्रकार की अग्नियों के समान तेजस्वी हैं। उन्होंने वरदान की शक्ति से हम पर आक्रमण करके हमारा स्थान छीन लिया है।
 
‘O God! The three sons of Sukesha are as radiant as the three types of fires. They have attacked us with the power of the boon and snatched our places.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)